प्यारो प्यारो रे हो वाला मारा…

(राग : प्यारो प्यारो रे हो…/मेली चादर अोढके…)

प्यारो प्यारो रे, हो वाला मारा पासजिणंद मने प्यारो;
तारो तारो रे, हो वाला मारा भवना दु:खडां वारो…!
काशीदेश वाणारसी नगरी, अश्वसेन कुल सोहीए रे;
पासजिणंदा वामानंदा, मा0 वा0 देखत जन मन मोहीये रे… प्यारो0।।1।।

छप्पन दिक्कुमरी मली अावे, प्रभुजीने हुलरावे रे;
थेई थेई नाच करे, मारा वाला, हरखे जिन गुण गावे… प्यारो0।।2।।

कमठ हठ गाल्यो प्रभु पार्श्वे, बलतो उगार्यो फणीनाग रे;
दीयो सार नवकार नागकुं, धरणेन्द्र पद पायो रे… प्यारो0।।3।।

दीक्षा लई प्रभु केवल पायो, समवसरणे सुहायो रे;
दीए मधुरी देशना प्रभुजी, चौमुख धर्म सुणायो रे… प्यारो0।।4।।

कर्म खपावी शिवपुर जावे, अजरामर पद पावे रे;
‘ज्ञान’ अमृत रस फरसे, मा0 वा0, ज्योतिसे ज्योत मिलावे रे… प्यारो0।।5।।

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